केदारनाथ धाम के कपाट खुले, 11 कुंतल फूलों से सजा बाबा केदार का धाम
केदारनाथ धाम के कपाट आज सुबह पांच बजे मेष लग्न में विधि विधान से खोल दिए गए हैं। इस दौरान मंदिर परिसर में तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज और हकहककूधारियों की उपस्थित रही। सीएम तीरथ सिंह रावत ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए घरों में ही रह कर पूजा अर्चना करने की अपील की हैं।
कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष भी केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के बिना ही खुले। कोरोना संक्रमण के कारण सरकार ने चारधाम यात्रा स्थगित की है। मंदिर में सिर्फ रावल, तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज व हकहककूधारियों को पूजा अर्चना की अनुमति होगी।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि देवस्थानम बोर्ड एवं मंदिर समितियों द्वारा चारों धामों में पहली पूजा पीएम मोदी की ओर से जनकल्याण के लिए की जा रही हैं। शनिवार शाम को केदारनाथ भगवान की पंचमुखी डोली केदारनाथ धाम पहुंची।
श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज विधि विधान से मंत्रोचारण के साथ सुबह पांच बजे खुल गये हैं।मंदिर के कपाट खुलने के पश्चात रावल भीमा शंकर लिंगम और मुख्य पुजारी बाघेश लिंगम ने स्वयंभू शिवलिंग को समाधि से जागृत किया तथा निर्वाण दर्शनों के पश्चात श्रृंगार तथा रूद्राभिषेक पूजाएं की गयी। pic.twitter.com/CtRysp17Ib
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) May 17, 2021
कोविड गाइडलाइन का पालन
देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीडी सिंह केदारनाथ धाम में व्यवस्थाओं को देख रहे हैं। गढ़वाल आयुक्त एवं देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने चारधाम के कपाट खुलने के अवसर पर कोविड गाइडलाइन का पालन करने को कहा हैं।
बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया भी शुरू
बदरीनाथ धाम के कपाट 18 मई को प्रात: 4 बजकर 15 बजे खुल रहे हैं। रविवार को श्री नृसिंह मंदिर से आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी, रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी के साथ योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर पहुंच गए हैं। आज शाम श्री उद्धव एवं श्री कुबेर के साथ ही आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी बदरीनाथ धाम पहुंचेगी।
तुंगनाथ मंदिर के कपाट आज खुलेंगे
तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के कपाट भी आज खोले जाएंगे। आज दोपहर 12 बजे कर्क लग्न में कपाट खोल दिए जाएंगे। वहीं देवस्थानम बोर्ड ने कपाट खोलने की सभी तैयारियां पूरी कर दी हैं। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर अभी श्रद्धालुओं को धाम में जाने की अनुमति नहीं हैं।




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