सोनिया का पीएम मोदी को पत्र, कोरोना संकट में माता-पिता को खोने वाले बच्चों को नवोदय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा दी जाए
कोरोना महामारी के दौरान कई बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया। परिवार में उनकी देखरेख करने वाला कोई नहीं बचा हैं। ऐसे में कांग्रेस ने केंद्र सरकार से उनकी शिक्षा और उज्जवल भविष्य के लिए गुहार लगाई। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को पीएम मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि उन बच्चों को नवोदय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा देने के बारे में विचार किया जाए, जिन्होंने कोरोना महामारी के कारण अपने माता-पिता या फिर इनमें से किसी एक को खो दिया हैं।
उन्होंने पीएम को पत्र लिखकर कहा कि अनाथ बच्चों के घर में जीविका चलाने वाला अब कोई नहीं बचा है, ऐसे में इन बच्चों को बेहतर भविष्य की उम्मीद देना राष्ट्र के तौर पर हम सबकी जिम्मेदारी हैं। साथ ही उन्होंने ने कहा, ‘‘कोरोना महामारी की भयावह स्थिति के बीच कई बच्चों के माता-पिता में से किसी एक या फिर दोनों को खोने की खबरें आ रही हैं जो तकलीफदेह हैं। ये बच्चे सदमे में हैं और इनकी सतत शिक्षा और भविष्य के लिए कोई मदद उपलब्ध नहीं हैं।’’
महामारी में अनाथ हुए बच्चों के भविष्य के बारे में सोचे सरकार
उन्होंने पूर्व पीएम और अपने पति राजीव गांधी के कार्यकाल में शुरू किए गए नवोदय विद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समय देश में 661 नवोदय विद्यालय चल रहे हैं। इसमें महामारी के दौरान जो बच्चे अनाथ हुए हैं। उन्हें इसमें दाखिले के लिए सरकार विचार करें।
राज्य सरकारों ने मदद का किया एलान
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पीएम से आग्रह किया कि उन बच्चों को इन नवोदय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के बारे में विचार किया जाए जिन्होंने कोविड के कारण अपने माता-पिता या फिर इनमें से घर की जीविका चलाने वाले व्यक्ति को खो दिया हैं। सोनिया ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि एक राष्ट्र के तौर पर हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि हम अकल्पनीय त्रासदी से गुजरने के बाद इन बच्चों को अच्छे भविष्य की उम्मीद दें।’’
बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई हैं। इसमें तो कई ऐसे थे, जिनकी कमाई से पूरा परिवार चलता था, लेकिन उनके निधन के बाद परिवार में रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया हैं। गरीब, मध्यम परिवार के बच्चे अनाथ हो गए हैं। हालांकि कई राज्य सरकारों ने अनाथ बच्चों को मदद देने का एलान भी किया हैं। मध्यप्रदेश, दिल्ली समेत कुछ अन्य राज्यों ने ऐसे बच्चों को चिह्नित करने के लिए समिति भी गठित की हैं।




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