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RSS-BJP मय’ हुए नीतीश कुमार, राहुल गांधी ने बिहार विधानसभा में हुए हंगामे पर किया ट्वीट

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पुलिस को विशेष अधिकार देने के प्रावधान वाले एक विधेयक को लेकर बिहार विधानसभा में हुए हंगामे पर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आरएसएस-भाजपा मय हो गए हैं। दरअसल राहुल गांधी ने ट्वीट किया, बिहार विधानसभा की शर्मनाक घटना से साफ़ हैं कि मुख्यमंत्री पूरी तरह आरएसएस-भाजपा मय हो चुके हैं। साथ ही उन्होंने ने यह भी कहा, लोकतंत्र का चीरहरण करने वालों को सरकार कहलाने का कोई अधिकार नहीं हैं। विपक्ष फिर भी जनहित में आवाज उठाता रहेगा- हम नहीं डरते! वहीं राहुल गांधी के इस ट्वीट के बाद कांग्रेस के अन्य नेता भी भाजपा और आरएसएस पर उग्र हो गए। कांग्रस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने लिखा है कि अव्वल तो आरएसएस की कोई मौलिक सोच है ही नहीं, और जो थोड़ी बहुत हल्की सोच है भी, तो उसमें लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति निष्ठा का स्थान नहीं है। इधर, राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी शायराना अंदाज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला किया। उन्होंने लिखा है कि तेरी तानाशाही और तेरे अत्याचार का वक्त हिसाब करेगा, आंदोलन में बहा लहू का एक एक कतरा इंसाफ़ करेगा। युवाओं की जवानी बर्बाद करने वाले, वक्त तेरा भी गणित ठीक करेगा। बेरोजगारों पर लाठियाँ चलाने वाले निर्दयी, समय युवाओं का भी आएगा।

 

नए पुलिस बिल को लेकर हुआ हुआ बवाल। 

बिहार विशेष अधिकार पुलिस विधेयक-2021 के विरोध में हुआ था हंगामा मंगलवार को बिहार विशेष अधिकार पुलिस विधेयक-2021 के विरोध में जबरदस्त हंगामा हुआ। यह हंगामा करीब छह घंटे तक चलता रहा। विपक्ष के विधायकों ने कई घंटे तक विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा को उनके चैंबर से बाहर नहीं निकलने दिया। काफी जद्दोजहद के बाद देर शाम इस विधेयक को पास किया पाया। विधेयक के पेश करने और पारित होने के दौरान सदन की कार्यवाही पांच बार स्थगित करनी पड़ी। 

विधानसभा के इतिहास में संभवत: पहली बार पुलिस को सदन के अंदर जाना पड़ा। आसन को घेरे विपक्षी विधायकों को बलपूर्वक हटाया गया, तब जाकर आसन पर विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा बैठ पाये। इसके पहले विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष के बाहर राजद, कांग्रेस, माले, भाकपा और माकपा के विधायकों ने धरना दिया। नारेबाजी की और उन्हें सदन में नहीं जाने दिया गया। करीब आधे घंटे से अधिक समय तक सदन की घंटी बजती रही, इस दौरान स्पीकर को आसन तक पहुंचाने की मार्शलों ने हरसंभव कोशिश की, लेकिन विपक्ष के कड़े तेवर से वे कामयाब नहीं हो पाये।

अंत में विधानसभा सचिवालय को पुलिस बुलानी पड़ी। चार बजे के करीब बाद डीएम चंद्रशेखर सिंह और एसएसपी उपेंद्र सिंह विधानसभा परिसर पहुंचे। उन्होंने भी धरना पर बैठे विपक्षी विधायकों को समझाने की कोशिश की और स्पीकर को सदन में जाने देने का अनुरोध किया, पर अपनी जिद पर अड़े विपक्षी सदस्यों ने उनकी एक नहीं सुनी।
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