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तिस्ता समझौता, बांग्लादेश को एक बार फिर भारत से बड़ी उम्मीदें

बांग्लादेश के राष्ट्रपति से बात करतेहुए पीएम नरेंद्र मोदी ( ANI ) 

पीएम मोदी बांग्लादेश की अपनी दो दिवसीय यात्रा पूरी कर भारत लौट आए हैं। ढाका से दिल्ली के लिए निकले से पहले पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए बांग्लादेश के लोगों का धन्यवाद किया। साथ ही उन्होंने बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना के साथ मुलाकात को सार्थक बताया। 

पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए अपने दो दिवसीय बांग्लादेश दौरे का अनुभव सांझा किया। इस बीच उन्होंने ट्वीट करते कहा, “मैं अपनी यात्रा के दौरान बांग्लादेश के लोगों को उनके स्नेह के लिए धन्यवाद करता हूं।  मैं गर्मजोशी से आतिथ्य के लिए पीएम शेख हसीना और बांग्लादेश सरकार का भी धन्यवाद करना चाहता हूं । इसके साथ ही उन्होंने कहा मुझे यकीन हैं कि इस यात्रा से दोनों राष्ट्रों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी। पीएम मोदी ने आगे ट्वीट करते हुए कहा कि बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हामिद के साथ बैठक भी शानदार रही। भारत-बांग्लादेश सहयोग को लेकर हमारे बीच व्यापक चर्चा हुई। मोदी की हसीना से हुई बातचीत के बारे में बताते हुए विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने कहा की, पीएम मोदी ने फेणी नदी के जल बंटवारे का मसौदा जल्द तैयार करने की भी मांग की। मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच जल बंटवारे को लेकर सहयोग जारी रहेगा। दोनों देशों के बीच अभी 56 नदियों के जल बंटवारे पर सहयोग चल रहा हैं।

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गौरतलब हैं कि तीस्ता समझौते पर सितंबर 2011 में उस समय के  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान हस्ताक्षर होने थे, लेकिन आखिरी क्षणों में इसे टाल दिया गया था। दरअसल, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीस्ता नदी के जल का एक बड़ा हिस्सा बांग्लादेश को दिए जाने के खिलाफ आपत्ति जताई थी।


तीस्ता नदी की भौगोलिक स्थिति

तीस्ता नदी एक ट्रांस-हिमालयी नदी हैं। तीस्ता नदी का उद्गम स्थल समुद्र तल से लगभग 7 हजार मीटर ऊपर, पाहुनरी ग्लेशियर से होता हैं। यह सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में रंगपुर से होकर बहती हैं। और बाद में यह ब्रह्मपुत्र में मिल जाती हैं। तीस्ता नदी की कुल लंबाई लगभग 309 किलोमीटर है और यह लगभग 12,540 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हैं।

कब से चल रहा है विवाद?

1815 में नेपाल के राजा और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच तीस्ता नदी के पानी को लेकर समझौता हुआ। तब राजा ने नदी के बड़े हिस्से पर नियंत्रण अंग्रेजों को सौंप दिया था। बांग्लादेश के आजाद होने के 12 साल बाद 1983 में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ। पानी का 36% हिस्सा बांग्लादेश और बाकी भारत के हिस्से में आया। लेकिन पिछले 18 साल से बांग्लादेश इस पर दोबारा विचार करने पर अड़ा हैं।

2011 में नहीं हुआ समझौता

2011 में तिस्ता नदी पर विवाद सुलझाने के काफी करीब थे। तब यह तय हुआ था कि दिसंबर-मार्च के बीच दोनों देश नदी के पानी का 50-50% बंटवारा करेंगे। हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध के कारण यह समझौता नहीं हो पाया।


हिमालय से उत्पन्न होने वाली और सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल से होकर असम में ब्रह्मपुत्र नदी में विलय होने वाली तीस्ता नदी के जल का बंटवारा भारत और बांग्लादेश के बीच संभवतः सबसे बड़ा विवाद हैं। सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में रंगपुर से होकर बहती हैं। जिसके कारण यह इन क्षेत्रों में रहने वाले हज़ारों लोगों की जल संबंधी आवश्यकता के लिये काफी महत्त्वपूर्ण हैं।

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