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चीन के मुकाबले भारतीय वायुसेना की बढ़ेगी मारक क्षमता

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भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता और मजबूत होने वाली हैं। आज शाम फ्रांस से तीन राफेल फाइटर जेट भारत आ रहे हैं। ये गुजरात में लैंड होंगे। फ्रांस से निकलने के बाद UAE की मदद से इसमें एयर-टु-एयर री-फ्यूलिंग भी होगी। एक महीने के भीतर, वायु सेना के बेड़े में 10 और राफेल लड़ाकू विमान शामिल होने जा रहें हैं।  इससे राफेल विमानों के दूसरे स्क्वाड्रन के गठन का रास्ता भी साफ होता  नज़र आ रहा हैं। नए विमानों के आने से वायु सेना में राफेल की संख्या बढ़ कर 21 हो जाएगी। इससे पहले वायुसेना के अंबाला बेस के 17 स्क्वाड्रन में 11 स्क्वाड्रन शामिल किए गए हैं।


अगले महीने के अंत तक सात और फाइटर जेट मिलेंगे

एक सरकारी सूत्र ने बताया कि, तीन राफेल फाइटर जेट दो से तीन दिनों में सीधे फ्रांस से भारत के लिए उड़ान भरेंगे, जिन्हें आकाश में वायु सेना द्वारा ईंधन दिया जाएगा। इसके बाद अगले महीने के दूसरे पखवाड़े में सात से आठ लड़ाकू विमान और उनके ट्रेनर संस्करण उपलब्ध होंगे।  इससे हमारी मारक क्षमता और अधिक बढ़ जाएगी।

सूत्रों ने बताया कि फ्रांस के ये सभी विमान अंबाला एयर बेस पर पहुंचेंगे।  वहां से इनमें से कुछ को हाशिमारा भेजा जाएगा, जहां राफेल लड़ाकू जेट के दूसरे स्क्वाड्रन के गठन की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी हैं। बता दें कि एक स्क्वाड्रन में 15 से 18 विमान होते हैं। हाशिमारा वायु सेना स्टेशन बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में भारत-भूटान सीमा के करीब हैं। 2016 में, भारत ने 36 राफेल लड़ाकू जेट खरीदने के लिए फ्रांस के डसॉल्ट एविएशन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस साल अप्रैल के अंत तक, इनमें से 50 प्रतिशत विमान भारत आने वाले हैं। 

हाशिमारा वायु सेना के संचालन का एक रणनीतिक आधार है क्योंकि यह भूटान और चुम्बी घाटी के करीब है। चुम्बी घाटी में ही भारत, भूटान और चीन और डोकलाम के बीच ट्राई-जंक्शन स्थित है, जहां 2017 में चीनी सेना के साथ एक लंबा गतिरोध चला था। तीन ही देशों के लिए उक्त ट्राई-जंक्शन चिंता का कारण हैं।
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