रूस-यूक्रेन के बीच क्यों है तनातनी, क्यों बढ़ता जा रहा है तनाव? जानिए पूरी वजह
Russia-Ukraine War : रूस-यूक्रेन विवाद अब तीसरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा हैं। रूस ने अपने और यूक्रेन के बीच आने वालों को धमकी दी है तो वहीं, अमेरिका ने भी सख्त चेतावनी के साथ कहा है कि अंजाम बहुत बुरा होगा। ब्रिटेन और दूसरे देश भी रूस के खिलाफ खड़े हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जंग के पीछे की वजह इस बार NATO को माना जा रहा हैं। NATO यानी "North Atlantic Treaty Organization" जिसे साल 1949 में शुरू किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद NATO का गठन किया गया।
बता दें कि यूक्रेन NATO में शामिल होना चाहता हैं, लेकिन रूस ऐसा नहीं चाहता। इसके पीछे तर्क ये है कि यूक्रेन अगर नाटो से जुड़ जाता है तो रूस पूरी तरह घिर जाएगा, क्योंकि भविष्य में नाटो देश की मिसाइलें यूक्रेन की धरती पर तैनात की जाएगी, जो भविष्य में उसके लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता हैं।
सोवियत संघ के जमाने में कभी मित्र रहे ये प्रांत दो देश बनने के बाद एक दूसरे के शत्रु क्यों बन गए हैं?
यूक्रेन की सीमा पश्चिम में यूरोप और पूर्व में रूस से जुड़ी हैं। 1991 तक यूक्रेन पूर्ववर्ती सोवियत संघ (USSR) का हिस्सा था। अलग होने के बाद भी यूक्रेन में रूस का प्रभाव काफी हद तक दिखाई देता था। यूक्रेन की सरकार भी रूसी शासन के आदेश पर ही काम करती थी। लेकिन, बढ़ती महंगाई, बिगड़ती अर्थव्यवस्था, और अल्पसंख्यक रूसी भाषी लोगों के बहुसंख्यक यूक्रेनी लोगों पर शासन ने विद्रोह की चिंगारी सुलगा दी।
जिसका परिणाम दक्षिणी यूक्रेन क्रीमिया पर रूस ने कब्जा कर लिया। बात यही नहीं रुकी, रूस ने यूक्रेन के अलगाववादियों को खुला समर्थिन दिया। तभी से यूक्रेन सेना और अलगाववादियों के बीच जंग जारी हैं। यहां आपको ये समझना है कि पूर्वी यूक्रेन के कई इलाकों पर रूस समर्थित अलगाववादियों का कब्जा हैं। यहीं के डोनेटस्क और लुहांस्क को तनातनी के बीच रूस ने अलग मुल्क के तौर पर मान्यता दे दी, इसे डोबास रिज़न के नाम से भी जाना जाता हैं। ये वही इलाका है जहां पुतिन ने सैन्य एक्शन का ऑर्डर दिया। जिसके बाद रूस ने अमेरिका और दूसरे देशों की पाबंदियों की परवाह किए बगैर गुरुवार को यूक्रेन पर हमला बोल किया।
अगर रूस अभी नहीं रूका तो यूक्रेन के बड़े हिस्से पर रूस कब्जा कर लेगा, अगर ऐसा हुआ तो तीसरे विश्व युद्ध होना तय हैं। जिसका परिणाम एक बार फिर रूसी विस्तार से दुनिया का नक्शा बदल जाएगा।




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